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जकार्ता. इंडोनेशिया की सुंदा खाड़ी में सुनामी की चपेट में आकर 281 लोगों की मौत हो गई। 1000 से ज्यादा जख्मी हैं। आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, शनिवार देर रात अनाक क्राकातोआ ज्वालामुखी फटने के बाद समुद्र के नीचे भूस्खलन आ गया। इससे उठी ऊंची लहरों ने तटीय इलाकों में तबाही मचा दी। दक्षिणी सुमात्रा के किनारे स्थित कई इमारतें तबाह हो गईं।
अभी नहीं टला सुनामी का खतरा
सुंदा के तटीय क्षेत्रों में एक और सुनामी आ सकती है। इंग्लैंड की पोर्ट्समाउथ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रिचर्ड टियू के मुताबिक, क्राकातोआ ज्वालामुखी अभी भी भड़क रहा है, इसके चलते फिर से समुद्र तल पर भूस्खलन की स्थिति पैदा हो सकती है। 1883 में क्राकातोआ ज्वालामुखी के फटने के बाद करीब 36 हजार लोगों की जान चली गई थी।
मौतों का आंकड़ा बढ़ सकता है
इंडोनेशिया के आपदा प्रबंधन विभाग के प्रवक्ता सुतोपो पुरवो नुग्रोहो ने मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई है। इमारतों के मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए पहले ही पुलिस के साथ सैन्यकर्मियों को लगाया गया है। सुंदा खाड़ी इंडोनेशिया के जावा और सुमात्रा द्वीप के बीच है। यह जावा समुद्र को हिंद महासागर से जोड़ती है। सुमात्रा के दक्षिणी लाम्पुंग और जावा के सेरांग और पांदेलांग इलाके में सुनामी का सबसे ज्यादा असर पड़ा।
लोगों को सावधान नहीं कर पाया आपदा प्रबंधन विभाग
एबीसी के रिपोर्टर डेविड लिप्सन के मुताबिक, आपदा विभाग लोगों को सुनामी के बारे में बताने में नाकाम रहा। पहले ऊंची लहरें उठने पर कहा गया था कि पूरे चांद की वजह से ज्वार भाटा आ सकता है। विभाग ने लोगों से अफवाह न फैलाने की अपील की थी। हालांकि अब एजेंसी ने माफी मांगी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस भ्रम की एक वजह यह थी कि सुनामी से पहले भूकंप जैसी कोई गतिविधि नहीं थी।