म.प्र

इंदौर की 9 विधानसभा सीटों में से भाजपा ने 5 और कांग्रेस ने 4 पर जीत दर्ज की

Indore Bureau - vaidikpostnews.com 12-Dec-2018 02:21 pm

इंदौर. मंगलवार सुबह से ही चुनाव परिणाम को लेकर कांग्रेस और भाजपा के साथ ही आम जनता में दिनभर गहमा-गहमी रही। यहां की 9 विधानसभा सीटों में से 5 पर भाजपा और 4 पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की। साल 2013 में भाजपा ने यहां 8 सीट जीती थी। यहां की सबसे चर्चित सीट इंदौर-3 में आखिरकार भाजपा महासचिव के बेटे आकाश विजयवर्गीय ने जीत हासिल की। उन्होंने कांग्रेस के अश्विन जोशी को 4500 से अधिक मतों से पराजित किया। हार स्वीकारते हुए जोशी ने कहा कि आकाश धनबल से चुनाव जीते अब क्षेत्र में भंडारे की राजनीति प्रारंभ होगी।

इंदौर की 9 सीटों पर यह रहा लेखा जोखा

इंदौर-1
कांग्रेस के संजय शुक्ला ने भाजपा के वर्तमान विधायक सुदर्शन गुप्ता को 8163 वोट से हराया। 2013 में गुप्ता यहां से 54176 वोट से जीते थे। संजय शुक्ला ने भाजपा की इस लीड को समाप्त करते हुए भाजपा को करारी हार दी। शुक्ला परिवार से संजय पहले व्यक्ति हैं जो विधायक बने है। संजय के पिता विष्णुप्रसाद शुक्ला भाजपा के कद्दावर नेेता रहे हैं जिन्हें भाजपा ने दो बार विधायक का टिकट दिया था।

इंदौर-2
यहां से भाजपा के रमेश मेंदोला ने कांग्रेस के मोहन सेंगर को 70331 वोटों से हराया। इंदौर-2 भाजपा का गढ़ माना जाता है। यहां से 2013 में भाजपा के रमेश मेंदोला ने 91017 से जीत दर्ज की थी। इस बार भाजपा ने पहले यहां से दो लाख से अधिक वोटों से जीतने का दावा किया था। हालांकि कांग्रेस ने जब यहां से मोहन सेंगर को मैदान में उतारा तो भाजपा ने सामने तगड़ा उम्मीदवार देख यह कहना प्रारंभ कर दिया कि इस बार एक लाख से अधिक वोटों से जीतेंगे। हालांकि मोहन सेंगर ने यहां से तगड़ा मुकाबला किया और भाजपा की 91 हजार की जीत को 70 हजार पर ला दिया।

इंदौर-3
भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय के पुत्र आकाश ने यहां से कांग्रेस के अश्विन जोशी को हराया। इस सीट पर भारी कश्मकश रही। मतगणना के दौरान कई बार कांग्रेस तो कई बार भाजपा आगे रही। कुछ समय अश्विन जोशी ने लगातार अपनी बढ़त बनाए रखी थी जिससे यहां भाजपा की हार नजर आने लगी थी हालांकि भारी उठा-पटक के मध्य अंतत: आकाश ने साढ़े 4 हजार से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की। यह सीट इसलिए भी चर्चा में थी क्योंकि बेटे को टिकट दिलाने के लिए कैलाश ने दिल्ली तक लाॅबिंग की थी और यहां से भाजपा की विधायक उषा ठाकुर को महू भेेज दिया था जिसका पार्टी में ही विरोध हुआ था।

इंदौर-4
यहां से भाजपा की मालिनी गौड ने कांग्रेस के सुरजीत सिंह चड्‌डा को 42 हजार से अधिक वोट से हराया। यह सीट भाजपा का गढ़ मानी जाती है। मालिनी यहां से लगातार तीसरी बार विधायक चुनी गई है। उससे पहले उनके पति स्व. लक्ष्मणसिंह गौड़ दो बार यहां से विधायक रहे है। इस बार उम्मीद की जा रही थी कि कांग्रेस के सुरजीत यहां से भाजपा को टक्कर देंगे, चुनाव प्रचार के दौरान भी यह बात दिखाई दी थी लेकिन भाजपा ने यहां से अपनी जीत के अंतर को पिछली बार के मुकाबले बढ़ाया है।

इंदौर-5
इंदौर की सबसे बड़ी विधानसभा सीट इंदौर-5 में भी भारी उतार-चढ़ाव रहा। अतंत: यहां से भाजपा के महेन्द्र हार्डिया ने कांग्रेस के सत्यनारायण पटेल को हरा दिया। मतगणना के दौरान एक समय पटेल 10 हजार से अधिक वोटों से आगे थे लेकिन अंतिम दौर में भाजपा ने वापसी की और नजदीकी मुकाबले में यहां से जीत दर्ज की।

राऊ
यहां से कांग्रेस के जीतू पटवारी ने भाजपा के मधु वर्मा को 5759 वोट से हराया। पटवारी इस सीट पर वर्तमान विधायक है। मतगणना के दौरान भारी-उतार चढ़ाव देखा गया। एक समय भाजपा यहां से 7 हजार वोट से आगे हो गई थी लेकिन अंतिम चरणों की मतगणना में पटवारी ने जो बढ़त बनाई वह अंत तक कायम रही।

सांवेर
यहां से कांग्रेस के तुलसी सिलावट ने भाजपा के वर्तमान विधायक राजेश सोनकर को लगभग 6 हजार वोट से हरा दिया। सिलावट इस सीट से पूर्व में विधायक रह चुके है। साल 2013 के विधानसभा चुनाव में सोनकर ने सिलावट को 17583 वोट से हराया था। इस सीट पर भी मतगणना के दौरान उतार-चढ़ाव रहा लेकिन जीत कांग्रेस की हुई।

देपालपुर
यहां से कांग्रेस के विशाल जगदीश पटेल ने भाजपा के मनोज निर्भयसिंह पटेल को 9044 वोट से हरा दिया। साल 2013 में भाजपा के मनोज पटेल ने 30197 वोट से यहां जीत दर्ज की थी। इस बार प्रारंभ से ही यहां पर कांग्रेस ने बढ़त बनाए रखी और जीत दर्ज की।

महू
डॉ अम्बेडकर नगर महू यहां पर भाजपा की उषा ठाकुर ने कांग्रेस के अंतरसिंह दरबार को 6 हजार से अधिक वोटों से हराकर जीत दर्ज की। इस सीट भी काफी चर्चा में रही क्योंकि भाजपा ने इंदौर-3 से उषा का टिकट काटकर महू भेजा था। दरबार यहां के स्थानीय उम्मीदवार थे और उन्हें काफी मजबूत माना जा रहा था। मतगणना के कई चरणों में कांग्रेस आगे भी रही लेकिन जीत भाजपा की हुई। इसके साथ ही उषा ठाकुर के नाम अलग-अलग विधानसभा से लगातार तीन चुनाव जीतने का रिकॉर्ड भी बन गया।

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